॥ श्री गुरुभ्यो नमः ॥उत्तराखंड, भारत
Himalayan Siddhashram Guru Parampara — HSGPHimalayan Siddhashram Guru Paramparaनिखिलश्रीमहाविद्या पीठ

माँ की उपासना का मार्ग

श्रीविद्या को समझें

श्रीविद्या, ललिता त्रिपुरसुंदरी देवी की उपासना, ज्ञान और साधना का मार्ग है। गुरु के मार्गदर्शन में साधक इस ज्ञान को अपने जीवन में उतारता है।

Shri Yantra — traditional geometric diagram
चित्र का स्रोत · CC BY-SA 3.0

जानिए · समझिए · साधना से जुड़िए

ज्ञान और साधना का परिचय

15 लेख और विषय

Guru Paduka — symbolic artwork
दीक्षा और मार्गदर्शन

गुरु दीक्षा

गुरु दीक्षा साधक को गुरु–शिष्य संबंध और हिमालयन सिद्धाश्रम गुरु परंपरा में स्थापित करती है। यहाँ प्रस्तुत साधना मार्ग का आधार गुरु दीक्षा है।

Shri Ganapati — traditional devotional image
श्रीविद्या

श्री महागणपति

मंगलमय शुरुआत, एकाग्र उपासना और साधना में प्रवेश की स्थिरता।

Trishul, crescent and damaru — symbolic Shiva artwork
श्रीविद्या

बटुक भैरव साधना

बटुक भैरव शिव के रक्षक स्वरूप भैरव के बाल रूप हैं। यहाँ श्रीविद्या के क्रम में उनका स्थान श्री महागणपति के बाद है।

Bala Tripurasundari Devi — traditional devotional image
श्रीविद्या

बाला त्रिपुरसुंदरी देवी

माँ के बाल स्वरूप की उपासना—सरलता, भक्ति और ज्ञान का पवित्र संगम।

Maha Varahi Devi — traditional devotional image
श्रीविद्या

महावाराही देवी

श्रीविद्या में शक्ति का रक्षक और अनुशासित स्वरूप।

Matangi Devi — traditional devotional image
श्रीविद्या

राजमातंगी · श्यामला देवी

पवित्र वाणी, संगीत, समझ और भक्ति की सजग अभिव्यक्ति।

Shri Yantra — traditional geometric diagram
श्रीविद्या

श्री चक्र · श्री यंत्र

श्रीविद्या में माँ, सृष्टि और अंतर्मुखी यात्रा के चिंतन का पवित्र स्वरूप।

Inner preparation — symbolic droplet and light
श्रीविद्या

अंतःशुद्धि · साधना की तैयारी

अंतःशुद्धि में साधक अपनी भावना की पवित्रता, मन की स्थिरता और श्रीविद्या के अभ्यास में अनुशासन पर ध्यान देता है।

Moon and sixteen lights — symbolic Nitya illustration
श्रीविद्या

षोडश नित्या देवियाँ

श्रीविद्या का चंद्रकला-विचार और समय की बदलती लय में माँ का चिंतन।

Shri Yantra — traditional geometric diagram
दीक्षा और मार्गदर्शन

पंचदशी दीक्षा

पंचदशी, श्रीविद्या की केंद्रीय मंत्र परंपरा है। दीक्षा, मंत्र के शुद्ध स्वरूप, चिंतन और गुरु से प्राप्त ज्ञान के साथ इसका अर्थ खुलता है।

Lalita Tripurasundari Devi — traditional devotional image
दीक्षा और मार्गदर्शन

षोडशी और उन्नत मार्गदर्शन

ललिता त्रिपुरसुंदरी देवी की भक्ति और श्रीविद्या की गहन परंपरा के साथ षोडशी को ग्रहण किया जाता है। आगे की साधना गुरु के व्यक्तिगत मार्गदर्शन में चलती है।

Lalita Tripurasundari Devi — traditional devotional image
श्रीविद्या

ललिता त्रिपुरसुंदरी देवी

श्रीविद्या के केंद्र में माँ—भक्ति में आराध्या और चिंतन में चेतना का स्वरूप।

Shri Yantra — traditional geometric diagram
पूजन और अनुष्ठान

श्री चक्र नवावरण पूजन

नौ आवरणों के माध्यम से ललिता त्रिपुरसुंदरी देवी की क्रमबद्ध उपासना।

Lalita Tripurasundari Devi — traditional devotional image
पूजन और अनुष्ठान

ललिता सहस्रनाम अर्चनम्

माँ के हजार नाम—भक्ति, पवित्र स्वरूप और तत्त्वज्ञान का समागम।

Havan kund and sacred flame — symbolic artwork
पूजन और अनुष्ठान

हवन · होम

स्पष्ट संकल्प, सीखी हुई विधि और श्रद्धा के साथ अग्नि में पवित्र अर्पण।

ललिता त्रिपुरसुंदरी देवी

इस परंपरा में माँ को सृष्टि का आधार और चेतना का स्वरूप माना जाता है। भक्ति, चिंतन और नियमित साधना से साधक का माँ से संबंध गहरा होता है।

मंत्र, यंत्र और तंत्र

मंत्र साधक को पवित्र ध्वनि से जोड़ता है। यंत्र उपासना का आधार बनता है। तंत्र साधना और पूजा की पारंपरिक विधि देता है। साधक अपनी तैयारी के अनुसार गुरु से इनका ज्ञान प्राप्त करता है।

श्री चक्र और श्री यंत्र

श्री चक्र का श्रीविद्या में केंद्रीय स्थान है। इसके आवरण सृष्टि और साधक की अंतर्मुखी यात्रा का बोध कराते हैं। इसके अर्थ को समझने से उपासना में श्रद्धा और समझ दोनों बढ़ती हैं।

क्रम: साधना के साथ सीखना

तैयारी, दीक्षा और आगे की साधना योगिनी ब्रह्मांशी के मार्गदर्शन में चलती है। प्रत्येक शिष्य को उसकी तैयारी और गुरु के निर्देश के अनुसार साधना दी जाती है। आगे की दीक्षा का मार्गदर्शन उचित समय पर व्यक्तिगत रूप से दिया जाता है।

दैनिक जीवन में साधना

जप का नियमित समय, संयमित आचरण, भक्ति और अपने कर्तव्यों के प्रति सजगता साधना की नींव बनते हैं। शुरुआत अपनी भावना स्पष्ट करके मार्गदर्शन प्राप्त करने से होती है।

श्रद्धा से शुरुआत

सच्ची भावना से साधना की शुरुआत होती है।

अपना परिचय दें और आगे की साधना के लिए मार्गदर्शन प्राप्त करें।

दीक्षा के लिए आवेदन