॥ श्री गुरुभ्यो नमः ॥उत्तराखंड, भारत
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श्रीविद्या

महावाराही देवी

श्रीविद्या में शक्ति का रक्षक और अनुशासित स्वरूप।

Maha Varahi Devi — traditional devotional image
चित्र का स्रोत · CC BY-SA 4.0
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वाराही और दण्डनाथा

वाराही अपने वराहमुख स्वरूप से पहचानी जाती हैं और मातृकाओं में पूजित हैं। ललिता की पवित्र कथा में दण्डनाथा के रूप में माँ की सेना के संचालन से उनका संबंध बताया गया है। श्रीविद्या की उपासना और देवी के स्वरूप-वर्णन में उनका विशिष्ट स्थान है।

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शक्ति के साथ जिम्मेदारी

वाराही के स्वरूप पर चिंतन शक्ति के उचित उपयोग की ओर ध्यान ले जाता है। संकल्प निभाने, अपनी भावना को समझने और स्थिरता से काम करने में साहस का महत्व प्रकट होता है। भक्ति के साथ अपने निर्णय, आचरण और संबंधों की जिम्मेदारी भी निभाई जाती है।

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ललिता की उपासना में स्थान

ललिता सहस्रनाम में दण्डनाथा के रथ और वाराही के पराक्रम का स्मरण आता है। मंत्रिणी अर्थात राजा श्यामला के साथ उनका स्थान माँ की शक्तियों और सहायिकाओं के व्यापक स्वरूप को समझने में सहायक है। नामों का अध्ययन देवी की पूरी कथा के संदर्भ में किया जाता है।

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वाराही साधना से जुड़ना

वाराही की उपासना में अलग-अलग पारंपरिक स्वरूप और साधनाएँ मिलती हैं। मार्गदर्शन के लिए साधक अपनी पूर्व दीक्षा और वर्तमान उपासना का परिचय दे, ताकि उसके आध्यात्मिक आधार को ध्यान में रखा जा सके। माँ के नामों और स्वरूप के अर्थ को समझना इस संवाद का अच्छा आरंभ है।

आगे का अध्ययनMaha Varahi — Srividya Learning Centre ↗Lalita Sahasranama — traditional text ↗

श्रद्धा से शुरुआत

सच्ची भावना से साधना की शुरुआत होती है।

अपना परिचय दें और आगे की साधना के लिए मार्गदर्शन प्राप्त करें।

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