॥ श्री गुरुभ्यो नमः ॥उत्तराखंड, भारत
Himalayan Siddhashram Guru Parampara — HSGPHimalayan Siddhashram Guru Paramparaनिखिलश्रीमहाविद्या पीठ

गुरु · साधना · शास्त्र

गुरु परंपरा से जुड़ा कार्य

निखिल श्रीमहाविद्या पीठ, गुरु सेवा, साधना और हिमालयन सिद्धाश्रम गुरु परंपरा से प्राप्त ज्ञान को आगे बढ़ाने का स्थान है।

Guru Paduka — symbolic artwork
प्रतीकात्मक भक्तिमय चित्र

पवित्र गुरु परंपरा

  1. सिद्धाश्रम के ऋषि, गुरु और सिद्ध
  2. परमहंस स्वामी सच्चिदानंद जी
  3. परमहंस स्वामी निखिलेश्वरानंद जी
  4. योगिनी ब्रह्मांशी

जानिए · समझिए · साधना से जुड़िए

ज्ञान और साधना का परिचय

4 लेख और विषय

Guru Paduka — symbolic artwork
गुरु और परंपरा

गुरु तत्त्व

गुरु तत्त्व वह प्रकाश है जिससे ज्ञान जीवन की समझ बनता है। गुरु–शिष्य संबंध में श्रद्धा के साथ सत्यनिष्ठा, विवेक और अभ्यास विकसित होते हैं।

Guru Paduka — symbolic artwork
गुरु और परंपरा

गुरु मंडल और सिद्धाश्रम

सिद्धाश्रम सिद्ध ऋषियों, गुरुओं और सिद्धों का पवित्र निवास है। गुरु मंडल वह पवित्र गुरु परंपरा है, जिसमें उनका ज्ञान और मार्गदर्शन गुरु से शिष्य तक पहुँचता है।

Guru Paduka — symbolic artwork
गुरु और परंपरा

गुरु मंडल पूजन

गुरु मंडल पूजन उन गुरुओं के प्रति श्रद्धा का अर्पण है जिनसे साधना का मार्ग प्राप्त होता है। कृतज्ञता, स्मरण और ग्रहणशीलता इसकी मूल भावना हैं।

Guru Paduka — symbolic artwork
गुरु और परंपरा

गुरु दक्षिणा, सेवा और गुरु–शिष्य संबंध

हिमालयन सिद्धाश्रम गुरु परंपरा में साधना, श्रद्धा और सेवा का जीवनभर का संबंध। गुरु दीक्षा, स्वैच्छिक दक्षिणा और गुरुकार्य में सहभागिता को समझें।

परमहंस स्वामी निखिलेश्वरानंद जी

परमहंस स्वामी निखिलेश्वरानंद जी, योगिनी ब्रह्मांशी के गुरुकार्य का आधार हैं। “निखिल” नाम इसी गुरु संबंध के प्रति समर्पण है।

सिद्धाश्रम और गुरु मंडल

सिद्धाश्रम सिद्ध ऋषियों, गुरुओं और सिद्धों का पवित्र निवास और तपोभूमि है। गुरु मंडल वह पवित्र गुरु परंपरा है, जिसमें ज्ञान, तप और मार्गदर्शन गुरु से शिष्य तक प्रवाहित होते हैं। परमहंस स्वामी सच्चिदानंद जी, परमहंस स्वामी निखिलेश्वरानंद जी तथा अन्य पूजनीय ऋषि, गुरु और सिद्ध इस जीवंत परंपरा से जुड़े हैं।

ज्ञान को जीवन में उतारना

योगिनी ब्रह्मांशी से साधक साधना, भक्ति और शिष्य के दायित्वों का मार्गदर्शन प्राप्त करते हैं। इस कार्य का आधार गुरु का ज्ञान, शास्त्र का अध्ययन और नियमित अभ्यास है।

श्रद्धा से शुरुआत

सच्ची भावना से साधना की शुरुआत होती है।

अपना परिचय दें और आगे की साधना के लिए मार्गदर्शन प्राप्त करें।

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