उज्जैन के संस्कार
उज्जैन में जन्मी और पली-बढ़ी योगिनी ब्रह्मांशी के जीवन में महाकाल भगवान की भक्ति का गहरा स्थान है। बचपन से पूजा, जप और मंदिरों के संस्कार उनके जीवन का हिस्सा रहे हैं।
गुरु सेवा का जीवन
उनके गुरु परमहंस स्वामी निखिलेश्वरानंद जी उनके आध्यात्मिक कार्य का आधार हैं। गुरु आदेश के अनुसार वे भक्ति, नियमित साधना और व्यक्तिगत जिम्मेदारी के साथ साधकों का मार्गदर्शन करती हैं।
महाकाल से हिमालय तक
वर्तमान में उत्तराखंड, भारत में रहते हुए उनकी साधना हिमालय की आध्यात्मिक भूमि से जुड़ी है। निखिल श्रीमहाविद्या पीठ पूजा, दीक्षा, सत्संग और साधना सहित उनके गुरुकार्य के लिए विकसित किया जा रहा है।
गृहस्थ जीवन में साधना
गृहस्थ जीवन के दायित्व और साधना साथ चलते हैं। उनका मार्गदर्शन साधकों को भक्ति, अनुशासन और सजग आचरण को अपने दैनिक जीवन में उतारने की प्रेरणा देता है।
योगिनी ब्रह्मांशी, डॉ. सोनल श्रीवास्तव के रूप में Endocrinologist भी हैं।

