गुरु · साधना · शास्त्र
गुरु की कृपा।
साधना का मार्ग।
माँ की उपासना। गुरु का मार्गदर्शन।
योगिनी ब्रह्मांशी के मार्गदर्शन में भक्ति, ज्ञान और नियमित साधना के साथ माँ की उपासना से जुड़ें।

साधना का परिचय
परंपरा से जुड़ी साधना।
भक्ति के साथ जीवन।
गुरु के मार्गदर्शन और शास्त्र के ज्ञान के साथ समझने, अभ्यास करने और आगे बढ़ने का स्थान।
॥ श्री गुरुभ्यो नमः ॥गुरुकार्य की प्रेरणा
पूज्य गुरुदेव
को समर्पित।
परमहंस स्वामी निखिलेश्वरानंद जी
“निखिल” नाम उन गुरु के प्रति समर्पण है जिनका ज्ञान इस कार्य का आधार है। योगिनी ब्रह्मांशी के माध्यम से गुरु सेवा की यही भावना मार्गदर्शन, दीक्षा और साधना के रूप में आगे बढ़ती है। पीठ हिमालयन सिद्धाश्रम गुरु परंपरा की पारंपरिक, गैर-व्यावसायिक भावना से संचालित गुरुकार्य है।
गुरु परंपरा को जानेंसाधना की शुरुआत
हर यात्रा की शुरुआत
एक कदम से होती है।
अपनी जिज्ञासा और अपनी भावना लेकर आएँ। तैयारी और आगे का मार्गदर्शन व्यक्तिगत रूप से तय किया जाता है।
दीक्षा की प्रक्रिया जानें- 01
संपर्क करें
अपनी पृष्ठभूमि और साधना के प्रति अपनी भावना बताएँ।
- 02
मार्गदर्शन लें
योगिनी ब्रह्मांशी से अपने अगले कदम का मार्गदर्शन लें।
- 03
साधना में आगे बढ़ें
प्राप्त निर्देशों के अनुसार नियमित साधना करें।
पढ़ें · विचार करें · समझें
समझ का एक कदम।
साधना से गहरा संबंध।
श्रद्धा से शुरुआत
सच्ची भावना से साधना की शुरुआत होती है।
अपना परिचय दें और आगे की साधना के लिए मार्गदर्शन प्राप्त करें।
दीक्षा के लिए आवेदन
