॥ श्री गुरुभ्यो नमः ॥उत्तराखंड, भारत
Himalayan Siddhashram Guru Parampara — HSGPHimalayan Siddhashram Guru Paramparaनिखिलश्रीमहाविद्या पीठ
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गुरु और परंपरा

गुरु मंडल पूजन

गुरु मंडल पूजन उन गुरुओं के प्रति श्रद्धा का अर्पण है जिनसे साधना का मार्ग प्राप्त होता है। कृतज्ञता, स्मरण और ग्रहणशीलता इसकी मूल भावना हैं।

Guru Paduka — symbolic artwork
प्रतीकात्मक भक्तिमय चित्र
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ज्ञान के स्रोत का स्मरण

साधना के आरंभ में गुरु का स्मरण, प्राप्त ज्ञान के स्रोत की ओर ध्यान ले जाता है। गुरु मंडल पूजन इस स्मरण को पूरी परंपरा तक विस्तृत करता है। अर्पण की भावना मार्गदर्शन, सुधार और धैर्यपूर्वक दिए गए ज्ञान के प्रति कृतज्ञता प्रकट करती है।

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पादुका और समर्पण का भाव

गुरु पादुका को गुरु की उपस्थिति और उनके दिखाए मार्ग का पवित्र प्रतीक मानकर पूजा जाता है। इस पूजन में विनम्रता और शिक्षा के अनुसार चलने की भावना प्रमुख है। पुष्प, दीप और निर्देशित अर्पण, समझ के साथ किए जाने पर इसी भीतरी भावना की अभिव्यक्ति बनते हैं।

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परंपरा का क्रम सीखना

गुरुओं के नाम, आवाहन, अर्पण और पूजन का क्रम अपनी गुरु परंपरा से सीखा जाता है। इस पीठ का आधार हिमालयन सिद्धाश्रम गुरु परंपरा है। शिष्य की तैयारी और किए जाने वाले पूजन के अनुरूप योगिनी ब्रह्मांशी मार्गदर्शन देती हैं।

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पूजन से जीवन तक

पूजन के बाद सेवा का भाव दैनिक व्यवहार में चलता है। अपने दायित्वों को शांति से निभाना, वाणी में सजगता और साधना की नियमितता, अर्पण के अर्थ को जीवन में उतारते हैं। सीखते समय उठने वाले प्रश्न स्पष्ट रूप से गुरु के सामने रखे जा सकते हैं।

आगे का अध्ययनHSGP — Guru–Shishya Sambandh ↗Guru Mandala Pooja — contextual reading ↗

श्रद्धा से शुरुआत

सच्ची भावना से साधना की शुरुआत होती है।

अपना परिचय दें और आगे की साधना के लिए मार्गदर्शन प्राप्त करें।

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