॥ श्री गुरुभ्यो नमः ॥उत्तराखंड, भारत
Himalayan Siddhashram Guru Parampara — HSGPHimalayan Siddhashram Guru Paramparaनिखिलश्रीमहाविद्या पीठ
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श्रीविद्या

बटुक भैरव साधना

बटुक भैरव शिव के रक्षक स्वरूप भैरव के बाल रूप हैं। यहाँ श्रीविद्या के क्रम में उनका स्थान श्री महागणपति के बाद है।

Trishul, crescent and damaru — symbolic Shiva artwork
प्रतीकात्मक भक्तिमय चित्र
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बटुक भैरव

भैरव उपासना सजगता, साहस और साधना की जिम्मेदारी को साथ लाती है। बटुक भैरव से भक्तिमय संबंध गुरु द्वारा दिए गए अभ्यास में प्रकट होता है। दैनिक आचरण और साधना स्थल की पवित्रता के प्रति ध्यान इस संबंध को पुष्ट करते हैं।

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श्रीविद्या में स्थान

यहाँ अपनाए गए क्रम में बटुक भैरव साधना श्री महागणपति के बाद और बाला त्रिपुरसुंदरी देवी से पहले आती है। गुरु शिष्य की तैयारी के अनुसार अभ्यास स्थापित करते हैं। इस क्रमबद्धता से प्रत्येक निर्देश को समग्र साधना में स्पष्ट स्थान मिलता है।

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मार्गदर्शन के साथ अभ्यास

मंत्र, पूजा विधि और विशेष अनुशासन व्यक्तिगत निर्देश से प्राप्त किए जाते हैं। मार्गदर्शन लेते समय अपनी वर्तमान भैरव या शिव उपासना की जानकारी दें। योगिनी ब्रह्मांशी आगे के अभ्यास को हिमालयन सिद्धाश्रम गुरु परंपरा और पहले से प्राप्त साधना के साथ जोड़ती हैं।

आगे का अध्ययनBhairav worship — introductory reference ↗

श्रद्धा से शुरुआत

सच्ची भावना से साधना की शुरुआत होती है।

अपना परिचय दें और आगे की साधना के लिए मार्गदर्शन प्राप्त करें।

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