आहुति का भाव
हवन या होम में निर्धारित पाठ के साथ पवित्र अग्नि में आहुतियाँ दी जाती हैं। इस उपासना में अग्नि का पूजनीय स्थान है। सावधानी से तैयार सामग्री को भावना के साथ अर्पित करना समर्पण को दृश्य रूप देता है। साधक अपने संकल्प के साथ पूजा में उपस्थित होता है।
साधना में होम का स्थान
होम किसी देवता की उपासना के साथ या बड़े अनुष्ठान के अंग के रूप में किया जा सकता है। देवता, मंत्र, सामग्री और क्रम से उसका विशिष्ट स्वरूप बनता है। परंपराओं में अलग विधियाँ हैं। एक पूरी विधि सीखने से तैयारी, मुख्य आहुतियाँ और समापन का संबंध स्पष्ट होता है।
सजग भागीदारी
होम में भाग लेने से पहले अवसर का संकल्प और अपनी भूमिका समझना उपयोगी है। ध्यान से सुनना, स्थान व्यवस्थित रखना और पूजा करा रहे व्यक्ति के निर्देश मानना आदर का व्यवहारिक रूप है। शांत गति से शब्द, क्रिया और पूजा का भाव साथ बने रहते हैं।
सावधानी से तैयारी
अग्नि-पूजा के लिए उचित हवा, अग्नि-सुरक्षित स्थिर व्यवस्था और देखरेख आवश्यक तैयारी हैं। सामग्री और विधि पूजा का मार्गदर्शन दे रहे व्यक्ति से पहले समझ लें। श्रद्धा और विधि की शुद्धता के साथ उपस्थित लोगों की सुविधा तथा सुरक्षा का ध्यान रखना भी सहभागिता का अंग है।
