पंद्रह तिथियाँ और महानित्या
श्रीविद्या में नित्या देवियों का संबंध चंद्र तिथियों से है। पंद्रह तिथि नित्याओं के साथ ललिता को सोलहवीं महानित्या के रूप में समझा जाता है। इसी कारण परंपरा में पंद्रह तिथि देवियों और षोडश अर्थात सोलह नित्याओं—दोनों का उल्लेख मिलता है।
परंपरा में प्रचलित नाम
प्रचलित तिथि नित्या नाम हैं—कामेश्वरी, भगमालिनी, नित्यक्लिन्ना, भेरुण्डा, वह्निवासिनी, महावज्रेश्वरी, शिवदूती, त्वरिता, कुलसुंदरी, नित्या, नीलपताका, विजया, सर्वमंगला, ज्वालामालिनी और चित्रा। ललिता महानित्या के साथ यह चिंतन पूर्ण होता है। नामों का शुद्ध अध्ययन उनके विशिष्ट स्वरूप और उपासना को समझने की शुरुआत है।
समय पर सजग चिंतन
चंद्रमा परिवर्तन की बार-बार लौटने वाली लय दिखाता है। इस पर चिंतन करते हुए साधक देख सकता है कि परिस्थितियाँ बदलने पर भी अपनी साधना की भावना कैसे स्थिर रखे। अभ्यास की छोटी डायरी नियमितता, सजगता और आवश्यक प्रश्नों को पहचानने में सहायक हो सकती है।
श्रीविद्या के साथ समग्र अध्ययन
नित्या देवी उपासना, ललिता, मंत्र और श्री चक्र की व्यापक समझ से जुड़ी है। विशिष्ट पूजा-विवरण गुरु की परंपरा से सीखे जाते हैं। शुरुआती अध्ययन में पहले शब्दों का अर्थ, फिर चंद्रचक्र, माँ के नामों और उपासना के भाव का संबंध समझना उपयोगी है।
