॥ श्री गुरुभ्यो नमः ॥उत्तराखंड, भारत
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दश महाविद्या

त्रिपुर भैरवी

तेजस्वी महाविद्या जिनका चिंतन अनुशासन, सजगता और साधना की भावना को कर्म से जोड़ता है।

Tripura Bhairavi Devi — traditional devotional image
चित्र का स्रोत · CC0
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भैरवी और भैरव

त्रिपुर भैरवी का संबंध भैरव तथा शिव-शक्ति की अभिन्नता से है। त्रिपुरा की पारंपरिक व्याख्या में जाग्रत, स्वप्न और सुषुप्ति तथा इच्छा, ज्ञान और क्रिया जैसी त्रयी का चिंतन मिलता है।

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स्वरूप में ज्ञान और अभ्यास

माँ के एक परिचित स्वरूप में पुस्तक, जपमाला और आशीर्वाद की मुद्राएँ मिलती हैं। अन्य वर्णनों में उनका उग्र पक्ष प्रमुख है। पुस्तक और माला ज्ञान तथा नियमित अभ्यास को साथ देखने का सुंदर आधार देते हैं।

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नियमितता की गुणवत्ता

नियमितता छोटे कर्मों में देखी जा सकती है—संकल्प निभाना, चुने हुए समय पर शुरुआत करना और कार्य ध्यान से पूरा करना। अपनी आदतों की ईमानदार समीक्षा से उत्साह और स्थिर लगन का अंतर स्पष्ट होता है। व्यवधान के बाद शांत भाव से अभ्यास फिर शुरू करना भी सीखने योग्य है।

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मार्गदर्शन में आगे बढ़ें

अपनी तैयारी, दिनचर्या और वर्तमान अभ्यास से जुड़े प्रश्न गुरु के सामने रखें। माँ के स्वरूप का अध्ययन और समझ तथा कर्म के संबंध पर मनन भक्तिपूर्ण शुरुआत हो सकती है। व्यक्तिगत निर्देश साधना को विशिष्ट दिशा और समय के साथ निरंतरता देते हैं।

आगे का अध्ययनManblunder: Tripura Bhairavi ↗

श्रद्धा से शुरुआत

सच्ची भावना से साधना की शुरुआत होती है।

अपना परिचय दें और आगे की साधना के लिए मार्गदर्शन प्राप्त करें।

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