भुवनों की ईश्वरी
भुवनेश्वरी समस्त भुवनों की ईश्वरी माँ के रूप में पूजित हैं। तांत्रिक व्याख्या में उनका संबंध आकाश तत्त्व से बताया गया है, जिसमें सृष्टि का विस्तार होता है। उनका नाम ललिता सहस्रनाम में भी आता है और माँ की व्यापक उपासना से जुड़ता है।
माँ के स्वरूप की भाषा
पारंपरिक चित्रों में माँ का तेजस्वी, राजराजेश्वरी स्वरूप पाश और अंकुश तथा आश्वासन और वरदान की मुद्राओं के साथ मिलता है। इस रूप में सामर्थ्य और निकटता साथ दिखाई देते हैं। आसन और आयुधों का विवरण चुने गए शास्त्रीय वर्णन के अनुसार बदलता है।
मनन का विषय
विस्तार का भाव एक व्यावहारिक प्रश्न देता है: क्या प्रतिक्रिया देने से पहले अपने विचार को देखा जा सकता है? दूसरे व्यक्ति के अनुभव के लिए जगह बनाने से संवाद में सहजता आती है। भुवनों की माँ का चिंतन हमारे साझा परिवेश के प्रति जिम्मेदारी का भाव भी जगा सकता है।
सजग भक्ति
अध्ययन की गति ऐसी रखें कि विषय समझ में उतर सके। अपने प्रमुख प्रश्न लिखें, प्राप्त शिक्षा पर फिर विचार करें और दैनिक व्यवहार की गुणवत्ता पर ध्यान दें। विशिष्ट मंत्र और पूजा का अभ्यास गुरु के निर्देश तथा साधक की तैयारी के संदर्भ में सीखा जाता है।

