॥ श्री गुरुभ्यो नमः ॥उत्तराखंड, भारत
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दश महाविद्या

बगलामुखी

पीताम्बरा देवी—विक्षोभ को स्थिर करने और वाणी के जिम्मेदार उपयोग पर चिंतन की महाविद्या।

Bagalamukhi Devi — traditional devotional image
चित्र का स्रोत · Public domain
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पीताम्बरा देवी

बगलामुखी माँ पीताम्बरा देवी, अर्थात पीले वस्त्र धारण करने वाली माँ के रूप में पूजित हैं। उनकी उपासना का संबंध स्तम्भन, यानी गति को रोकने या स्थिर करने से बताया गया है। इसका विशिष्ट अर्थ तांत्रिक परंपरा और पूजा के संदर्भ में समझा जाता है।

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माँ के पवित्र आयुध

पारंपरिक चित्रण में माँ गदा धारण किए और विरोधी की जिह्वा को पकड़े दिखाई देती हैं। ध्यान-वर्णनों में पीले वस्त्र और स्वर्णिम तेज प्रमुख हैं। यह स्वरूप शक्ति को वाणी, संयम और हानिकारक प्रवाह को रोकने के विषय से जोड़ता है।

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बोलने से पहले का विराम

दैनिक मनन में आवेग और बोले गए शब्द के बीच की जगह को देखें। एक विराम अतिशयोक्ति की जगह सटीकता और क्रोध की जगह स्पष्टता चुनने में सहायक हो सकता है। वाणी का प्रभाव संबंधों और जिम्मेदारियों तक जाता है; इस प्रभाव की सजगता स्वयं एक महत्वपूर्ण अभ्यास है।

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भावना और मार्गदर्शन

साधक अपनी साधना का उद्देश्य स्पष्ट रखे और मार्गदर्शन ग्रहण करने के लिए तैयार रहे। भक्तिपूर्ण अध्ययन से माँ के स्वरूप की समझ बढ़ती है; मंत्र और पूजा के निर्देश व्यक्तिगत रूप से दिए जाते हैं। सदाचरण और जिम्मेदारी आंतरिक स्थिरता की आकांक्षा को सार्थक आधार देते हैं।

आगे का अध्ययनManblunder: Bagalamukhi ↗Brahmastra Mahavidya Bagalamukhi Stotram — dhyana verses ↗

श्रद्धा से शुरुआत

सच्ची भावना से साधना की शुरुआत होती है।

अपना परिचय दें और आगे की साधना के लिए मार्गदर्शन प्राप्त करें।

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